लालू प्रसाद यादव भारतीय राजनीति के सबसे कद्दावर और जनप्रिय नेताओं में से एक हैं। उन्होंने बिहार और राष्ट्रीय राजनीति में सामाजिक न्याय (Social Justice) की एक नई इबारत लिखी और हाशिए पर खड़े लोगों को मुख्यधारा में लाने का ऐतिहासिक कार्य किया।
लालू प्रसाद यादव का जन्म एक साधारण किसान परिवार में हुआ था। संघर्षों के बीच उन्होंने अपनी शिक्षा पूरी की और छात्र राजनीति से शुरुआत करते हुए जेपी आंदोलन (1974) में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनका ज़मीनी जुड़ाव और ठेठ अंदाज़ उन्हें जनता के बीच बेहद लोकप्रिय बनाता है।
1990 में बिहार के मुख्यमंत्री बनने के बाद, लालू प्रसाद यादव ने समाज के शोषित, पीड़ित, पिछड़े और दलित वर्गों को सत्ता में भागीदारी दिलाई। 'मंडल कमीशन' को लागू करवाने और सामाजिक समानता स्थापित करने में उनके योगदान को भारतीय राजनीति के इतिहास में हमेशा याद किया जाता है। उन्होंने ग़रीबों को "स्वर" (आवाज़) दी।
2004 से 2009 तक भारत के रेल मंत्री के रूप में उनका कार्यकाल ऐतिहासिक रहा।
लालू प्रसाद यादव हमेशा से सांप्रदायिकता के मुखर विरोधी रहे हैं। 1990 के दशक में जब पूरे देश में सांप्रदायिक तनाव का माहौल था, तब उन्होंने बिहार में कड़े कदम उठाकर शांति और सद्भाव कायम रखा। उनकी राजनीति हमेशा समाज के हर तबके को साथ लेकर चलने की रही है।
आज भी लालू प्रसाद यादव की विचारधारा राष्ट्रीय जनता दल का मूल आधार है। उनका स्पष्ट मानना है कि विकास तभी सार्थक है जब पंक्ति में खड़े अंतिम व्यक्ति को उसका लाभ मिले। उनकी नेतृत्व क्षमता, अद्वितीय भाषण शैली और जनता के प्रति समर्पण उन्हें एक अजेय जननेता बनाता है।